सीएम की घोषणा, सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम, आधुनिक तटीय पुलिस व्यवस्था
कोलकाता। बंगाल सरकार ने समुद्र में मछली पकडऩे जाने वाले मछुआरों की सुरक्षा को और मजबूत व चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक फैसलों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को स्पष्ट किया कि गहरे समुद्र में मछुआरों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारतीय तटरक्षक बल का सीधा सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि आपात स्थितियों से निपटने के लिए तटीय क्षेत्रों में अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे और तटीय पुलिस थानों व राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह से आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की यह महत्वपूर्ण घोषणा हाल ही में शंकरपुर तट के पास हुई दुखद ट्रॉलर दुर्घटना की पृष्ठभूमि में आई है। बीते 2 जुलाई को शंकरपुर से समुद्र में उतरा एक ट्रॉलर अचानक हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें 15 मछुआरे लापता हो गए थे। राहत अभियान के दौरान इनमें से 11 मछुआरों के शव बरामद किए जा चुके हैं। रविवार को मुख्यमंत्री ने मृतक मछुआरों के परिजनों से मुलाकात कर पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक सौंपा और प्रत्येक पीडि़त परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।
सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि केवल आधुनिक उपकरण खरीद लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि एक मजबूत निगरानी तंत्र का होना भी जरूरी है। उन्होंने पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने तटीय सुरक्षा के बुनियादी ढांचे की घोर उपेक्षा की। तटीय पुलिस थाने तो बनाए गए, लेकिन उन्हें न तो पर्याप्त प्रशिक्षित पुलिसकर्मी मिले और न ही आधुनिक उपकरण। वर्तमान सरकार इन सभी कमियों को दूर कर तटीय पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह से सुदृढ़ करेगी।
मुख्यमंत्री ने राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के बड़े पैमाने पर विस्तार का भी ऐलान किया। उन्होंने बताया कि कोलकाता, दार्जिलिंग के पर्वतीय इलाकों और सुंदरबन क्षेत्र में एसडीआरएफ की विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। इसके साथ ही पर्यटकों और मछुआरों की सुरक्षा के लिए दीघा में 50 सदस्यीय विशेष एसडीआरएफ टीम स्थायी रूप से तैनात रहेगी। मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए गए हैं कि दीघा और शंकरपुर में आधुनिक उपकरणों से लैस यह प्रशिक्षित दल हर समय अलर्ट मोड पर रहे।
मछुआरों की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए ट्रॉलरों में आधुनिक 'टू-वे एमएसएस ट्रांसपोंडर' लगाने के अभियान को भी तेज किया जाएगा। यह वायरलेस ट्रैकिंग डिवाइस समुद्र में करीब 200 नॉटिकल मील की दूरी तक ट्रॉलर और कंट्रोल रूम के बीच सीधा रेडियो संपर्क बनाए रखता है। इससे न केवल आपात स्थिति में त्वरित मदद भेजी जा सकेगी, बल्कि मछुआरों को समुद्र में मछलियों की अधिक उपलब्धता और सुरक्षित क्षेत्रों की जानकारी भी मिलती रहेगी। वर्तमान में दीघा-मोहाना क्षेत्र के 1,500 ट्रॉलरों में से 200 में यह तकनीक लगाई जा चुकी है, जिसे जल्द ही सभी ट्रॉलरों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाएगा।